उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, 91 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, प्रदेश में शोक की लहर

देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भुवन चंद्र खंडूरी का सोमवार को निधन हो गया। उन्होंने 91 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। लंबे समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे खंडूरी का एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। उनके निधन की पुष्टि परिवार की ओर से की गई।

पूर्व मुख्यमंत्री के निधन की खबर सामने आते ही उत्तराखंड सहित राष्ट्रीय राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई। उनके परिवार में पत्नी अरुणा, पुत्र मनीष और बेटी रितु खंडूरी भूषण हैं, जो वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष हैं।

‘जनरल साहब’ के नाम से थी पहचान

राजनीति में आने से पहले भुवन चंद्र खंडूरी भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद पर सेवाएं दे चुके थे। अनुशासनप्रिय और सख्त प्रशासक की छवि के कारण उन्हें लोग ‘जनरल साहब’ के नाम से भी जानते थे।

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और उत्तराखंड की राजनीति में एक मजबूत और ईमानदार चेहरे के रूप में पहचान बनाई।

दो बार संभाली उत्तराखंड की कमान

भुवन चंद्र खंडूरी दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। वर्ष 2007 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें पहली बार मुख्यमंत्री बनाया गया था। हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।

इसके बाद वर्ष 2011 में भाजपा नेतृत्व ने एक बार फिर उन्हें राज्य की कमान सौंपी। अपने कार्यकाल में उन्होंने सुशासन, पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता दी।

अटल सरकार में निभाई अहम जिम्मेदारी

भुवन चंद्र खंडूरी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री भी रहे। देश को सड़क नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी ‘स्वर्णिम चतुर्भुज योजना’ को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

उनके नेतृत्व में सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में कई बड़े फैसले लिए गए, जिनका प्रभाव आज भी देशभर में देखा जाता है।

सीएम धामी ने जताया गहरा शोक

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि खंडूरी ने सेना और सार्वजनिक जीवन दोनों में अनुशासन, समर्पण और ईमानदारी का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका निधन केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है।

 

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